देशभक्ति का दिखावा और जनता कि सरकार

जिस दिन लद्दाख़ में भारत और चीनी सेना के बीच धक्का मुक्की की ख़बरे आई तब लगा कि हालात टेंशन जनक है मगर भयंकर लठ बजाई के बाद हुए नुकसान को देखते हुए लगा कि हालात तो तौबा-तौबा के मुकाम पर है। हमारे 20 जवानों की शाहदत हुई और उनके अभी आकड़े ही नहीं आये बाकी सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि उनके दुगने से ज़्यादा जवान ज़न्नत की हूरों के पास भेजे है। मगर इन सूत्रों को किस सूत्र से ख़बर मिलती है इसका अपने पास कोई सूत्र नहीं।

घटना के तुरंत बाद सेना और सरकार पूरी फुर्ती से अपने काम में लग गयी और हालात सँभालने की कोशिशे चरम पर है। जब इस तरह के वाक्यात होते है तब उसमे भावनाओं में बहकर निर्णय नहीं लिए जाते। ऐसी स्थिति को काबू करने के लिए दिमाग के सारे हाथी, घोड़े, भालू खोलने पड़ते है ताकि निर्णय देश हित में हो।

मगर भाई इतनी क्रन्तिकारी और देशभक्त जनता भगवान् किसी देश को ना दे। इतने क्रन्तिकारी लोग की सोशल मीडिया पर ऐसा क्रोधित होंगे जैसे ग़दर के तारा सिंह की तरह वे चीन जाकर उनका समर्सिबल उखाड़ लायेंगे या उनका पांडा उठा लायंगे। ऐसे लोगों को पानी पिलाकर शांत करना पड़ता है वरना वह कम से कम 20–25 स्टेटस डाले इन चीनियों के खिलाफ़ जिन्हें देख कर उनकी चूले हिल जायंगी और वह थर-थर कापने लगेंगे।

भईया बात ऐसी है उन्होंने भारतीय सेना को उकसाया हमला किया और हम मान कर चल रहे है हमने उनके ज़्यादा मार दिए और वे इस बेईज्ज़ती का घूँट पी गए. मगर उनके व्यवहार में एक तरह का प्रोफेशनलिज्म है वह एक प्रोफेशनल कब्ज़ा करने वाले प्रतीत होते है। वह निरन्तर यही कह रहे है बात करेंगे, बात से समस्या का हल करेंगे मगर ज़मीन पर कब्ज़ा करके बैठेंगे।

मित्रों समय के इस दौर में युद्ध की संभावना और युद्ध झेलने की तबीयत किसी में नहीं। मगर एक आर्थिक युद्ध है जो हम लड़ सकते है अगर हमारे क्रांतिकारी युवा और आज कल तो बुजुर्ग भी अगर अपने फ़ोन से टिक टोक और बाकी चीनी एप्लीकेशन हटा दे तो उनके राजस्व में भारी नुकसान होगा साथ ही जो समय हम बुरी-बुरी शक्लें बना कर ख़ुद को ब्रेड पिट-अनेजिलिना जॉली समझते है वह समय किसी ढंग के कार्य में लगा सकते है। चीनी सामान का बहिष्कार, क्या ख़रीदे क्या नहीं, कौन-सी कंपनी कौन-सी नहीं ये ज्ञान आज पूरे देश में बह रहा है बस उम्मीद है देश की जनता उस पर अमल करे इतनी देश भक्ति भी हो सकता है इन चीनियों के हथियारों के ज़खीरे को कम कर दे।

वैसे ख़ुद से और जनता से अपने को कोई ख़ास उम्मीद तो है नहीं बाकि उम्मीद पर दुनिया कायम है। वैसे तो सरकार सामर्थ्यवान प्रतीत होती है मगर फिर भी जनता को अँधेरे में रखा गया या रखा जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। देशभक्ति का दिखावा है और जनता कि सरकार है।

राम राम

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