


क्या आपको मालूम है राजा महाराजओं के ज़माने में अक्सर राजा, सेनापति या लड़ाके भीम काये शरीर वाले वाले भारी भरकम योद्धा होते थे. जिनका काम होता था रणभूमि में ग़दर मचाना, सर काटना, दुश्मन के पेट में तलवार घुसा कर घुमाना या अपने गले में दुसरे राजाओ की खोपड़ीयो की माला बनाकर घूमना.
क्या आप जानते हो ऐसा क्यों होता था. क्योकि उस समय भुजा बल सर्वश्रेष्ठ माना जाता था और जनता से उम्मीद की जाती थी की वो शारीरक रूप से इतने मजबूत हो की युद्ध के समय डट कर हालात का सामना कर सके.
आज सूचना प्राद्योगिकी के इस दौर में हम राजा महाराजओं के ज़माने से काफ़ी बेहतर और उन्नत है. मगर हम ऐसा कैसे कह सकते है आज तो युद्ध ही नहीं होते.
होते है बंधू आज भी युद्ध होते है मगर युद्ध के पैमाने बदल गए पहले जो युद्ध शारीरिक क्षमता पर हुआ करते आज वो मानसिक क्षमता पर आ चुके है. डिजिटल दुनिया के इस युद्ध में हम सभी पर ऱोज हमले होते है.
फलाना विदेश घुमने गया : हमला
फलाना गाड़ी ले आया : हमला
फलाने का बच्चा फर्स्ट आया : हमला
500 दोस्त 5 लाइक : हमला
मेरे मैसेज की रिप्लाई नहीं किया : हमला
फलाने के यहाँ शाही पनीर हमारे या टिंडे : हमला
फलाना …. हमला …. धिम्काना …. हमला
अब आप कहेंगे की अजी ये तो जलन वाली बात हो गयी दुसरे की देख के क्यों जलना सबकी किस्मत है ये और वो.
देखो भाई बाल बहादुर या तो आप बाबा बन जाओ यानी मोडे बन जाओ तब ठीक है वरना कोई माई का लाल ऐसा नहीं आज के टाइम जो दुसरे की चढ़ाई को ख़ुद पर हमला ना मानता हो. आज हमारे दिमागों में दिखावे की मात्रा इतनी ज्यादा भरी जा रही है की उसे झेलना अपने बस में नहीं है. आज हमारी हालत ऐसी हो गयी है जैसे मेले में इलेक्ट्रिक कार एक दुसरे के टक्कर मरती है वैसे ही हम एक दुसरे के टक्कर मार रहे है.
यदि आप को इन ऱोज ऱोज होते हमलो से बचना है फिर या तो भगवा सिलवा लो या सैमसंग गुरु ले लो कसम से ज़िन्दगी सवर जायगी
अपन को ये समझ आ गया भाई मानसिक रूप से मजबूत बनो ज़िन्दगी के हर युद्ध में काम आयगा.
राम राम
कटु सत्य