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Category: Poetry

LIBERATION

Posted on March 5, 2017

When I was born it was winter in the town People were gathered in the hope of the crown Then the sister came and made an announce she is an Angle from the heaven to the ground They all got shocked from the top to the down Yes I am liberal and liberation is my…

जाट आरक्षण

Posted on January 27, 2017

जाट आरक्षण (PDF) फेर आगे थम लेके बेडा नाटक खूब दिखाओगे रोला घाल क सडका पे घरा ने फेर जलाओगे लेरे गाड़ी लेरे किले रपिया की भी घाट नहीं जिद बेकार की होरी स  ना लोड इसी कोई खास नहीं भाई बड़े थम समझो थोडा अड़े कोई किसे ते डरता ना जरुरत पूरी हो जा से…

फैन होए हां

Posted on January 27, 2017June 7, 2020

  फैन होय हां   अंखा ने कटार मुख चन्न वरगा तेरी अध तकनी दे फैन होए हां   इक तेरी बलिये नि संग मार गई कुज गल्ला दिया लाली दे नी मोहे होए हां   हुए ने मुरीद तेरे चिट्टे सूट दे राता कालिया सी ज़ुल्फा च खोये होए हां   बज दे ने…

सलाम ना आया

Posted on December 15, 2016June 7, 2020

        सलाम ना आया (PDF)   थी गुफ़्तगू इक आने के उसकी ढल चला आफताब पर पैगाम ना आया   चढ़ा था सुरूर मय खाने में थे हम पर सदियों से प्यासों का वो “जाम” ना आया   खड़े थे कुचे में इक झलक ऐ दीदार को वो आये नज़र मिली पर…

ना चाहिये

Posted on October 24, 2016June 4, 2020

    ना चाहिए रपिये हो या ताकत का घणाजोर दिखाणा ना चाहिये कदे पासे उलटे पड़ जा से ज्यादा अकड़ में आणा ना चाहिये   राज हो या हो यारी कोई हर किसे ते बताणा ना चाहिये रोला हो या प्यार कोई घरक्या ते छुपाणा ना चाहिये   जमीन हो या गाय का कदे…

शहीद

Posted on October 16, 2016June 7, 2020

    शहीद PDF    वो रोज धमाके सुनते है जीते हैं जंग के साये मेंवो खडे हुए हैं सीमा परले असला अपनी बाहों में गोलियों की बरसात मेंवो लाल लहू से नहाते हैंहोली हो या दिवाली होसब सीमा पर ही मनाते हैं इक आस जो घर पर जाने कीजो पल भर में धुल जाती…

भगत सिंह

Posted on October 8, 2016June 7, 2020

भगत सिंह  ये सपूत भारत माँ के अकड़ किसी की नहीं सहते सच्चे सूरमे पक्के देशभक्त भगवान भरोसे नहीं रहते    मंजर अपनों की मौत वाला दौड़े आँखों में बन लाल लहु फिर हथियार उठाना पड़ता है तब होश ठिकाने नहीं रहते   तू शेर है भारत माता का दुश्मन के घर घुस वार करे…

कहर बनाई

Posted on September 30, 2016

36 गामा में बस्ता तू एक शहर बनाई है 36 गामा में बस्ता तू एक शहर बनाई है के कहने ऊपर वाले के जमा कहर बनाई है देख के जिसने घी सा घल्जा बुझा हुया लट्टू भी जलजा खेतों खेत ने जाती तू एक नहर बनाई है रात अँधेरी पाछे चढती सुबह सी आई है तेरे…

बदल जाते है

Posted on September 22, 2016June 4, 2020

बदल जाते है   निकल जाये जब मतलब अपना    लोगो के अकसर ख़्यालात बदल भी जाते है        दौड़ते है हौसले जब हाथों की रगों में    लकीरे, किस्मत और औकात बदल भी जाती है        बदलने पड़ते है राह, राही, राहगीर भी    मुश्किलों में मक़सद, मंजिल, भगवान बदल भी जाते है …

ना कोई क़यामत आईं है

Posted on September 14, 2016June 4, 2020

    इस हस्ते बस्ते शहर में कैसे गुमनामी छाई है सब उजड़ा उजड़ा लगता है क्या कहर सुनामी आयी है   बह गए दिलो के अरमा सारे सब किस्मत की रुसवाई है है अपने हाथो शहर ये उजड़ा ना कोई क़यामत आईं है   सालों बाद मिले है किस्मत इन अंजनी राहो में कहने…

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