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Category: Poetry

जो दौर गवाँए बैठे है

Posted on September 6, 2016June 4, 2020

    जो दौर गवाँए बैठे है   थे शौक नये अरमान बहुत बसते थे दिल में ख्वाब बहुत बचपन वाले दिनों का वो इतवार भुलाए बैठे है   आया फिर से याद वही जो दौर गवाँए बैठे है   कभी कच्चे पक्के रास्तो में कभी रेल बसों के धक्को में चार जून की  रोटी खातिर…

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