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भगत सिंह

Posted on October 8, 2016June 7, 2020
भगत सिंह

 ये सपूत भारत माँ के

अकड़ किसी की नहीं सहते

सच्चे सूरमे पक्के देशभक्त
भगवान भरोसे नहीं रहते 
 
मंजर अपनों की मौत वाला
दौड़े आँखों में बन लाल लहु
फिर हथियार उठाना पड़ता है
तब होश ठिकाने नहीं रहते
 
तू शेर है भारत माता का
दुश्मन के घर घुस वार करे
जो पीठ के पीछे ना मारे
सीधा सीने पर ही प्रहार करे
 
देख सामने मौत खड़ी
जो क्षण भर भी ना घबराये
तब इंकलाब का नारा दे
भारत की जय जयकार करे
 
तू राज दिलों पर करता है
तेरा दुनिया में है नाम बड़ा
जो तेरा रुतबा बतलाएं
इन नोटों की औकात नहीं
 
‘दीप’ आजादी मुफ्त नहीं
बड़ा मोल चुकाना पड़ता है
खुली हवा में जीने को
हथियार उठाना पड़ता है 
 

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