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ना कोई क़यामत आईं है

Posted on September 14, 2016June 4, 2020
 
 
इस हस्ते बस्ते शहर में
कैसे गुमनामी छाई है
सब उजड़ा उजड़ा लगता है
क्या कहर सुनामी आयी है
 
बह गए दिलो के अरमा सारे
सब किस्मत की रुसवाई है
है अपने हाथो शहर ये उजड़ा
ना कोई क़यामत आईं है
 
सालों बाद मिले है किस्मत
इन अंजनी राहो में
कहने वाला हुआ है क्या कुछ
बीते हुए जमानों में
 
गुजरा वक़्त है गुज़रे रिश्ते
गुजरे यार पुराने है
धीरे धीरे गुजर गया सब
अब तो सब अफ़साने है

पहले वाला नूर नहीं अब
आँखों में तन्हाई है 
खाकर कसम बता देना
ये किस से मिली जुदाई है
 
एक ख़्वाब बसा था आँखों में
और आती जाती सांसो में
टूटा मज़बूर हालातों में
रही इश्क़ सजा में पाई हैं
 
है अपने हाथो शहर ये उजड़ा
ना कोई क़यामत आईं है
 
 

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